अयोध्या राममंदिर में लगने वाले पत्थरों की पहली खेप पहुंची

अयोध्या

-रामजन्मभूमि परिसर में राममंदिर निर्माण के लिए ग्राउंड इंप्रूवमेंट का कार्य जोरों पर चल रहा है। इस कार्य के तहत राममंदिर के नींव के लिए खोदे गए करीब 50 फीट गहरे गड्ढे को लेयर डालकर भरा जा रहा है।
कुल 44 लेयर में राममंदिर की नींव भरी जाएगी। इसके बाद राममंदिर की प्लिंथ (फाउंडेशन) बनेगी। जिसके लिए कार्यदाई संस्था एलएंडटी ने मिर्जापुर के पत्थरों की आपूर्ति शुरू कर दी है।
मिर्जापुर के सुमित्रा मेसर्स से अनुबंध कर तीन लाख घनफुट पत्थरों की मांग की गई है। इसमें से बुधवार को 30 पत्थरों की पहली खेप ट्रक के जरिए अयोध्या पहुंची। पत्थरों की खेप पहुंचने पर रामनगरी के साधु-संतों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत भी किया।
पहले चरण में 19 हजार पत्थरों की आपूर्ति की जाएगी। नींव के पत्थरों के लिए मिर्जापुर में कार्यशाला शुरू की गई है। मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम व चुनार की पहाड़ियों से काटकर कर ये पत्थर तैयार किए जा रहे हैं।
एक पत्थर चार फुट लंबा, दो फुट चौड़ा व दो फुट ऊंचा है। ऐसे 30 पत्थरों की खेप बुधवार को अयोध्या पहुंची है। जैसे-जैसे कार्यशाला में पत्थर तैयार होते जाएंगे, उसकी आपूर्ति अयोध्या के लिए होती जाएगी।
राममंदिर के ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि मिर्जापुर के जो पत्थर आ रहे हैं, उन्हें एक निश्चित आकार दिया गया है। जब नींव का निर्माण शुरू होगा तो केवल उन्हें उसी आकार में ढालना होगा।
प्लिंथ निर्माण मिर्जापुर के बलुआ पत्थरों से किया जाएगा। इसकी आपूर्ति एलएंडटी ने शुरू कर दी है। वहीं पत्थरों की पहली खेप पहुंचने पर रामजन्मभूमि के गेट नंबर तीन पर हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास, विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा सहित अन्य साधु-संतों ने पत्थरों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
रमेश दास ने कहा कि राममंदिर का एक-एक अंश हमारे लिए पूजनीय है। ऐसे में नींव के लिए पत्थरों की पहली खेप आई है। इसका हमने पूजन कर निर्विघ्न राममंदिर निर्माण की कामना है।
शरद शर्मा ने कहा कि चूंकि ये पत्थर राममंदिर के प्लिंथ में लगने हैं। जिस पर गर्भगृह आकार लेगा। ऐसे में यह श्रद्धा का केंद्र है। राममंदिर निर्माण की प्रगति संतोषजनक है, नामी तकनीक विशेषज्ञों की निगरानी में बन रहा राममंदिर भव्यता के साथ-साथ तकनीक के मामले में भी अव्वल होगा।
राममंदिर की नींव 44 लेयर में भरी जानी है। लेयर डालने के काम तीव्र गति से चल रहा है। रोलर कंकरीट कंपैक्ट (आरसीसी) प्रणाली से नींव का का निर्माण हो रहा है।
12 इंच तक इंजीनियरिंग फिल्ड मटेरियल बिछाकर उसे दो इंच रोलर से कंपैक्ट किया जाता है। इस प्रकार एक लेयर 10 इंच मोटी होती है। अब तक ऐसी 13 लेयर डालने का काम पूरा हो चुका है।
ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि लेयर डालने के तुरंत बांद प्लिंथ का काम शुरू होगा। इसी के समानांतर ही परकोटा निर्माण भी शुरू करने की योजना है।

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