बीते एक साल में राहुल गांधी,ठाकरे,अमिताभ बच्चन आदि ने करायी इंटरनेशनल बेज्जती-देखे कैसे

  1. अच्छी-भली 370 हट गई थी. कांग्रेस को कीड़ा काटा. 370 पर बहस की मांग की.

परिणाम:- pok से लेकर चीन तक नेहरू जीे के कच्चे चिट्ठे खुल गए. 70 वर्षो से बनाया गया नेहरू जी का आभामंडल जनता के समक्ष खत्म हो गया. नेहरू देश के दिल से उतर गए.

  1. अच्छा-भला रफेल सौदा हो गया था. कांग्रेस को कीड़ा काटा. बहस की मांग की.

परिणाम:- राजीव गांधी जी के भ्रष्टाचार के कच्चे चिट्ठे खुल गए. 30 वर्षो से बनाई गई “मिस्टर क्लीन” छवि जनता के समक्ष धूमिल हो गई. राजीव गांधी देश के दिल से उतर गए.

  1. कोरोना असफलता, पालघर लिंचिंग, सुशांत मामले जैसे मुद्दों के वाबजूद शिवसेना, उद्धव ठाकरे की छवि जैसे-तैसे बची हुई थी. संजय राउत को कीड़ा काटा. कंगना को गाली दे दी.

परिणाम:- उद्धव ठाकरे, शिवसेना के कच्चे चिट्ठे खुल गए. वर्षो से बनी “हिंदुत्व” छवि हिन्दुओ के समक्ष धूमिल हो गई. शिवसेना की “दबंगई छवि”.. सड़कछाप गुंडागर्दी, महिला विरोधी पार्टी में बदल गई. “ठाकरे नाम” का आभामंडल जनता के दिल से उतर गया.

  1. पालघर चुप्पी, रामजन्मभूमि चुप्पी, सुशांत चुप्पी, कंगना अपमान चुप्पी के बाबजूद बच्चन परिवार की लँगोट जैसे-तैसे बची हुई थी. जया को कीड़ा काटा. थाली में छेद बयान दे दिया.

परिणाम:- अमिताभ बच्चन जिन पर कोई उंगली भी नही उठा सकता था, उनके कच्चे चिट्ठे खुल गए. जया-अमिताभ के पाखण्ड के पर्दे उठ गए. 50 वर्षो से बना “महानायक” आभामंडल जनता के समक्ष खत्म हो गया. बच्चन फैमिली जनता के दिल से उतर गई.

  1. अच्छी-भली दूसरी लहर कम हो गई थी. तमाम लापरवाही, साइड इफेक्ट्स, दवाईयों में लूट के बाबजूद देश ने वारियर्स नाम दिया. समुचित सम्मान दिया. IMA को कीड़ा काटा. आयुर्वेद के खिलाफ बयान दे दिया.

परिणाम:- जिस IMA पर कोई सवाल उठाने की सोच भी नही सकता था, उसके कच्चे चिट्ठे खुल रहे है. मिचनरीज सम्बंध/फार्मलाबी सांठगांठ से लेकर धर्मांतरण के दबे काले कारनामे कब्र खोदकर निकल रहे है. IMA के पाखंड के पर्दे उठ रहे है.

देश को पहली बार पता चला कि, IMA कोई सरकारी संस्था या संवेधानिक आयोग नही, बल्कि स्वघोषित NGO मात्र है. नतीजा 93 वर्षो से बनी छवि धूमिल हो गई. IMA जनता के दिल से उतर गया.

विगत 70 वर्षों से जनता को भेड़ की तरह हांकने वाले ये “बड़े नाम” कदाचित भूल गये कि “ये नया भारत है, ये 2021 का भारत है”..
जो यदि प्यार लुटाकर आपको अर्श तक पहुंचा सकता है. तो भरोसा टूटने पर आपको फर्श पर गिरा भी सकता है.

“छल की बुनियाद” पर बनी, झूठी “शान-ओ-शौकत” की “इमारतें” कितनी ही “मजबूत” क्यों न हो.. एक दिन भरभराकर “गिरती” अवश्य है..

ये नियति का “लोकतंत्र” है..

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