अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की बड़ी रणनीति, क्या होंगी भारत के लिए नीतियां

काफी विवादों में रहा अमेरिकी राष्ट्रपति का सपथ ग्रहण आखिरकार 20 जनवरी को पूरा हुआ। इसी के साथ अमेरिका में एक नई राजनैतिक व कूटनीतिक पारी की भी शुरूआत हो गई। डोनाल्ट ट्रंप के 4 साल के कार्यकाल के बाद तमाम विवादों के बीच जो बाइडेन का इनोग्रेशन पूरे विश्व की मीडिया में चर्चे का विषय बना रहा। जिस वक्त पूरे विश्व की निगाहें अमेरिका की ओर थी उसी वक्त शपथ लेने से पहले जो बाइडेन के रक्षा मंत्री जनरल लॉयड ऑस्टिन ने भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। लॉयड ऑस्टिन अपनी नियुक्ति की पुष्टि के लिए अमेरिकी सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश हुए। उन्होंने कमेटी के एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं भारत का “प्रमुख रक्षा सहयोगी” का दर्जा जारी रखूंगा और साझा हितों पर अमेरिकी एवं भारतीय सेना की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने का प्रयास करूंगा।



वहीं ऑस्टिन ने चीन को लेकर कहा कि चीन पहले ही “क्षेत्रीय दादा” बन चुका है और अब उसका लक्ष्य प्रभावी “वैश्विक शक्ति” बनने का है। चीन अमेरिका से हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने के लिए काम कर रहा है और जरूरत है कि हमारी सरकार एक साथ मिलकर विश्वसनीय तरीके से काम करे। वहीं नवनिर्वाचित विदेश मंत्री ब्लिंकन ने निवर्तमान रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति का समर्थन किया।

ब्लिंकन ने कहा कि भारत से सहयोग क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों में शुरू हुआ था। ओबामा प्रशासन के दौर में हमने रक्षा खरीद और सूचना साझेदारी में सहयोग बढ़ाया तथा ट्रंप प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाकर हिन्द-प्रशांत सहयोग की रणनीति पर काम किया। ब्लिंकन ने चीन पर कहा कि जब हम चीन को देखते हैं तो इसमें कोई शक नहीं है कि एक राष्ट्र के तौर पर वह हमारे हितों, अमेरिकी लोगों के हितों के लिए सबसे अधिक चुनौती पेश कर रहा है। अमेरिका को इस चुनौती का सामना कमजोरी के बजाय मजबूती से करना चाहिए।



रक्षा मंत्री ऑस्टिन ने पाकिस्तान पर बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान के द्वारा आतंकवाद पर की गई कार्यवाही अभी अधूरी है। पाकिस्तान ने लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी संगठनों के खिलाफ भी कार्यवाही की है, हालांकि यह कार्यवाही अधूरी है। यदि मैं रक्षा मंत्री बना तो मैं पाकिस्तान पर अपनी जमीन का प्रयोग आतंकवादियों और हिंसक कट्टरपंथी संगठनों की शरणगाह के तौर पर नहीं होने देने के लिए दबाव बनाऊंगा।
इस दौरान विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि चीन के खिलाफ हम भारत के साथ हैं। हम भारत के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि क्षेत्र में चीन समेत कोई देश भारतीय संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सके और आतंकवाद के मुद्दे को भी हम साथ मिलकर निपटा रहे हैं। दोनों देशों के आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्षय उर्जा व विभिन्न तकनीकों के मजबूत हिमायती हैं। मेरे ख्याल से दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने की मजबूत संभावनाएं हैं।

वहीं सपथ ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरफ से भारत के लिए पहला बयान आया जिससे साफतौर पर जाहिर होता है कि आने वाले समय में अमेरिका के साथ भारत के अच्छे सम्बन्ध हो सकते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी के दैनिक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कई बार भारत का दौरा किया है। वह भारत के साथ अमेरिका के संबंधों का सम्मान करते हैं और आगे भी जारी रहेगा।


अब अमेरिका से इस तरह के बयानों का आना चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। चीन और उसका गुलाम पाकिस्तान इस भ्रम में थे कि नई सरकार के आने और डोनाल्ड के जाने से शायद भारत-अमेरिका रिश्ते प्रभावित होंगे। लेकिन फिलहाल ऐसे संकेत नहीं मिल रहें हैं बल्की भारत के लिए सकारात्मक संदेश ही सुनने को मिल रहे हैं। उम्मीद है कि जो बाइडेन भारत के साथ रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने वाले जो बाइडेन भारत-अमेरिका के बीच सफल द्विदलीय संबंधों का सम्मान करते हैं।
कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति बनने पर जेन साकी ने कहा कि एक भारतीय-अमेरिकी का उपराष्ट्रपति बनाना ऐतिहासिक क्षण है और इससे भारत-अमेरिका के रिश्ते और मजबूत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध पहले भी काफी अच्छे रहे हैं और नए राष्ट्रपति इस परंपरा को और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

Joe Biden is sworn in as president at the US Capitol on January 20

बाइडन की टीम में भारतीय मूल के 20 अमेरिकी हैं शामिल


अमेरिका की नव निर्वाचित सरकार में सबसे खास बात ये है कि राष्ट्रपति बाइडेन की टीम में भारतीय मूल के 20 अमेरिकियों जगह मिला है। यह भारत के लिए गर्व की बात है वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के मुंह पर करारा तमाचा साबित हुआ है। इस टीम की बात करें तो टीम में शामिल नीरा टंडन बजट तैयार करने में अहम रोल निभाएंगी। वहीं माला अडिगा राष्ट्रपति की पत्नी की पॉलिसी सलाहकार हैं। सबरीना सिंह की बात करें तो वो बाइडन की पत्नी यानी फर्स्ट लेडी की मीडिया का रोल निभाएंगी। आयशा शाह को सोशल मीडिया और मीडिया ब्रीफिंग का काम सौंपा गया है। इसी तरह समीरा फाजली आर्थिक मामलों पर जो बाइडेन को सलाह देंगी। भरत रामामूर्ति आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं वहीं गौतम राघवन राष्ट्रपति के लिए स्टाफ की नियुक्ति करेंगे। सुर्खियों में रहे वेदांत पटेल राष्ट्रपति के असिस्टेंट प्रेस सेक्रेटरी का कार्य करेंगे। विनय रेड्डी को राष्ट्रपति के भाषणों को लिखने की जिम्मेदारी दी गई है। सोनिया अग्रवाल पर्यावरण मामलों के लिए वरिष्ठ सलाहकार और विदुर शर्मा अमेरिका को कोरोना से बचाने वाली टीम का हिस्सा हैं।
तो ये रहा अमेरिका की नई सरकार में भारत का असर जो साफतौर पर जाहिर करता है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका के रिश्तों में नया कीर्तिमान स्थापित हो सकता है।


अमेरिकी संविधान में निर्धारित है शपथ ग्रहण की तारीख-
अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए 20 जनवरी की तारीख भी निर्धारित की गई है. चुनाव होने के करीब ढाई महीने के बाद निर्वाचित राष्ट्रपति शपथ लेते हैं। हालांकि 1937 के पहले तक यहां शपथ ग्रहण चार मार्च को होता था। चुनाव के बाद और शपथ ग्रहण से पहले के ढाई माह का समय ट्रांजिशन पीरियड कहलाता है। “फ्रेंकलीन डी रूजवेल्ट” पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे जिन्होंने 20 जनवरी 1937 को शपथ ली थी।

 क्या होता है इनोग्रेशन डे?

अमेरिकी संसद में शपथ ग्रहण समारोह को इनोग्रेशन डे कहा जाता है। यह शपथ ग्रहण समारोह वाशिंगटन डीसी में होता है जो कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति और नई सरकार के कार्य की शुरूआत का प्रतीक है। राष्ट्रपति चुने गए जो बाइडन व्हाइट हाउस में इनोग्रेशन डे तक आधिकारिक तौर पर प्रवेश नहीं कर सकते। फिलहाल 20 जनवरी को अमेरिका में नई सरकार का इनोग्रेशन डे मनाया गया जिसके बाद डेमोक्रेट नेता जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति और कमला हैरिस ने उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लिया।

अमेरिकी शपथ का यह है प्रारूप-

‘…राष्ट्रपति पद की सपथ लेते हैं, मैं पूरी इमानदारी से यह शपथ लेता हूं कि मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के कार्यालय का ईमानदारी से संचालन करूंगा और संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान की अपनी पूरी छमता के साथ संरक्षण, रक्षा और बचाव के सर्वोत्तम प्रयास करूंगा।‘

78 वर्षीय बाइडेन ने 20 जनवरी बुधवार को सौ वर्ष पुरानी बाइबल पर हाथ रखकर शपथ ली। बाइडन अमेरिका के सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। सपथ ग्रहण के पश्चात अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए बाइडन ने अमेरिकी लोगों को एकजुट होने की अपील की तथा अमेरिका को और ताकतवर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह किसी उम्मीदवार की जीत का जश्न नहीं, लोकतंत्र की जीत का जश्न है। हम मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। हम अमेरिका की एकता के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत होगा। मैं लोकतंत्र और हर अमेरिकी की रक्षा करने का वादा करता हूं।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

22,037FansLike
2,878FollowersFollow
18,100SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles