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ऑटो रिक्शा चालक की बेटी बनी मिस इंडिया रनर अप

ऑटो रिक्शा चालक की बेटी बनी मिस इंडिया रनर अप

कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है मतलब साफ है कि किसी काम को पूरा करने के रास्ते में कितनी ही मुश्किलें क्यों ना आएं लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान बड़ी से बड़ी मुश्किलों का सामना कर सकता है और अपनी मंजिल को पा सकता है। ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के हाटा के रहने वाले ऑटो रिक्शा चालक ओमप्रकाश सिंह की पुत्री 20 वर्षीय मान्या सिंह ने। मान्या सिंह का जन्म देवरिया जनपद के बैतालपुर विकासखंड के विक्रमपुर बिशनपुर गांव में हुआ है बाद में उनके पिता कुशीनगर के हाटा में मकान बनाकर रहने लगे। आजकल मान्या सिंह के पिता मुंबई में रहकर ऑटो रिक्शा चलाते हैं। मान्या सिंह ने मुंबई में आयोजित फेमिना मिस इंडिया 2020 में रनर अप का खिताब जीत लिया है।

एक साधारण परिवार में जन्मी मान्या का मिस इंडिया तक का सफर इतना आसान नहीं था इसको पूरा करने के लिए उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन हर कठिनाई का डटकर मुकाबला करने वाली मान्या आज विजेता बनकर उभरीं हैं। मान्या ने कहा, ‘‘मैं मिस इंडिया का ख्वाब देखने से भी डरती थी। मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लगता है कि मेरे जैसा कोई इतना बड़ा सपना कैसे पूरा कर सकता है। लेकिन आज वह सपना सच हो गया। अब सुकून है कि मैंने कर दिखाया, मैंने अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया, 14 साल की उम्र में, मैं देखती थी कि मेरे की लड़कियां जीवन का आनंद उठा रही हैं, अच्छे कपड़े पहन रही हैं, स्कूल जा रही हैं।” मान्या के जीवन में ऐसा भी समय आया जब उनके माता पिता के पास उनके स्कूल में फीस देने के पैसे भी नहीं होते थे। उस वक़्त मान्या की मां ने अपने गहने गिरवी रखकर मान्या की पढ़ाई पूरी करवाई। मान्या डॉक्टर या इंजीनियर न बनकर कुछ अलग करना चाहती थी और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए मान्या 14 साल की उम्र में भागकर मुंबई आ गईं। मुंबई आकर उन्होंने एक पिज़्ज़ा आउटलेट में काम किया, बर्तन धोकर, फर्श साफ कर अपना गुजारा किया। मान्या कहती हैं कि वहां रहकर मैंने सीखा की लोग कैसे कपड़े पहनते हैं कैसे बात करते हैं और खुद को किस तरह पेश करते हैं। एक साल वहां काम करके मैंने बहुत कुछ सीखा। इसके बाद मैंने एक कॉल सेंटर में काम किया, भाषा और बोलचाल के तरीके में बदलाव किए। अपनी शिक्षा का खर्च उठाने के लिए काम करना शुरू किया जिससे मेरा व्यक्तित्व निखरा और मैं मिस इंडिया के लिए तैयार होने लगी।

ब्यूटी पेजेंट में शामिल होने की बात पर उनके घरवाले कहते थे कि हमारे जैसे लोअर क्लास फैमिली के लोग सपने भी नहीं देख सकते और तुम मिस इंडिया की बात कर रही हो। मान्या का कहना है कि यह सुनने के बावजूद वह समाज के निचले तबके से आने वाली महिलाओं की आवाज बनना चाहती थीं और उन्हें लगा कि मिस इंडिया का मंच लक्ष्य पाने में उनकी मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे एहसास हुआ कि मिस इंडिया एक ऐसा मंच है जहां मैं अपनी बात, अपने विचार रख सकती हूं। ऐसी महिलाओं की आवाज बन सकती हूं जिन्हें कहा जाता है कि उन्हें बोलने का अधिकार नहीं है, जिन्हें एक दायरे में बांधकर रखा जाता है।” मान्या के जीवन में बहुत अड़चनें आईं लेकिन आज उनके मिस इंडिया रनर अप चुने जाने पर उनके माता पिता बहुत खुशी और गर्व महसूस कर रहे हैं।

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